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प्रेम दीवानी मीरा को क्यों पागल-वागल कहते हो | Prem Deewani Meera Ko Kyu Pagal Wagal Kehte Ho




आँख से बहते आँशु को 
क्यों काजल वजल कहते हो
प्रेम दीवानी मीरा को 
क्यों पागल-वागल कहते हो

वो शिव मेरा में शक्ति हूँ
ओ अधात्य: मेरा में भक्ति हूँ 
में सनकी शयर हूँ वो
पागल फ़ितूर मेरा है 

में मासूम मोहब्बत हूँ
वो मगरूर-गुरुर मेरा है
खत उसी पर सुरु
ओ दस्तूर मेरा है

में मांग हूँ सुनी-सुनी शी
ओ सुंदर मेरा है
ये फेरे वेरे रश्में  है
झूटी मुठी कश्मे  है

चोट उसे लगे कभी तो
खून मेरा भर जाएगा
मेरी इश्क़ कहानी को
अश्व मेरा दोहराएगा

ओ गलती से भी गलत करे तो
मुझे सजा देना मोला 
मेरी हस्सी उसके होठो पर
हर बार सजा देना मोला

हो जाए बेवफा जब मुझसे
देगा न समझ लेना मोला
रब उसकी ख्वाहिश
ओ अदा करना मोला

व उसकी आँशु इन आँखों 
में मुझे रुला देना मोला
उसको पास बुलाने से पहले
मुझको पास बुला लेना मोला


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