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मुस्कुराओ - नायाब मिधा | Muskurao by Nayab Midha | Hindi Poetry by Nayab Midha

Muskurao by Nayab Midha



मुस्कुराओ,
अगर आज कहीं से हार गए हो,
किसी को उस जीत की तुम से ज्यादा
जरूरत थी शायद, मुस्कुराओ,
अगर कुछ खो गया है,
जिसके नसीब का था उसको मिल
गया है शायद, मुस्कुराओ,
अगर दिल टूट गया है,
किसी का जोड़ने के लिए किसी का
तोड़ना पड़ता होगा शायद,
और रह जाए अगर दिल में फिर भी
दर्द कहीं, तो बांट कर मुस्कुराओ,
और है अगर दिल में खुशी ज्यादा,
तो same process दोहराओ,
मुस्कुराओ,
जब बार बार ये सोच कर
हताश हो जाते हो,
कि इससे अच्छा ये हो जाता,
इससे अच्छा वो हो जाता,
तब ये सोच कर मुस्कुराओ,
कि इससे बुरा हो जाता,
तो क्या हो जाता, मुस्कुराओ,
अगर सर पे है छट बदन पर कपड़ा,
और है थाली में खाना,
और है अगर जरूरत से ज्यादा,
तो बांट कर घर आना, मुस्कुराओ,
जब पूछे कोई,
कि जिन्दगी जीने का है क्या सलीका, 
मुस्कुराओ ये कहकर,
कि हमने जिन्दगी से मुस्कुराना ही
सीखा, मुस्कुराओ, मुस्कुराओ,
even if you have to walk miles and miles, because it's okay,
if your glass is half empty,you can always fill it with smiles, मुस्कुराओ


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