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एही नदी के तीर a song from औघड़ | ft. Nilotpal Mrinal | Ehi Nadi Ke Teer Lyrics




रे साधु एही नदी के तीर
हमने देखा बहता नीर

भरा कटोरा जगत का त्यागा
चल गया मस्त फ़क़ीर रे साधु
एही नदी के तीर
हमने देखा बहता नीर

काली घटा घनघोर को काटे
निकला भोर औघड़
खाके मिट्टी ले गया मुक्ति
बिन हल्ला बिन शोर

औघड़ को कोई बाँध न पाए
नहीं बानी जंजीर रे साधु
एही नदी के तीर
हमने देखा बहता नीर

मन का खजाना माया टूटे
बैठा कोई मद्दारी
ठग के हाथ में ठौर के चाभि
चोर की चौकी दारी

मेसे जगत को कुनक चलारे
औघड़ को नहीं पीर रे साधु
एही नदी के तीर
हमने देखा बहता नीर

भरा कटोरा जगत का त्यागा
चल गया मस्त फ़क़ीर रे साधु
एही नदी के तीर
हमने देखा बहता नीर



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