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पत्थर तोड़ रहा मजदूर कविता | Patthar Tod Raha Majadoor Kavita | मजदूर दिवस कविता | Poem on Labour day



पत्थर तोड़ रहा मजदूर
थक के मेहनत से है चूर
फिर भी करता जाता काम
श्रम की महिमा है मशहूर

मेहनत से न पीछे रहता
कभी काम से न ये डरता
पार्वत काट बनाता राह
नव निर्माण श्रमिक है करता

नदियों पर ये बाँध बनाता
रेल पटरियां यही बिछाता
श्रम की शक्ति से मजदूर
कल कारखाने भवन बनाता

खेत में करता मेहनत पूरी
पाता है किसान मजदूरी
कतराता जो भी है श्रम से
उसे घेरती है मजबूरी |

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