HOT!Subscribe To Get Latest VideoClick Here

Ticker

6/recent/ticker-posts

हे मातृभूमि कविता | Hey Mathrubhumi Kavita | रामप्रसाद बिस्मिल | Ram Prasad Bismil

हे मातृभूमि कविता | Hey Mathrubhumi Kavita | रामप्रसाद बिस्मिल | Ram Prasad Bismil


हे मातृभूमि ! तेरे चरणों में सिर नवाऊँ
मैं भक्ति भेंट अपनी, तेरी शरण में लाऊँ ।

माथे पे तू हो चन्दन, छाती पे तू हो माला
जिह्वा पे गीत तू हो, तेरा ही नाम गाऊँ ।

जिससे सपूत उपजें, श्रीराम-कृष्ण जैसे
उस धूल को मैं तेरी निज शीश पे चढ़ाऊँ ।

माई समुद्र जिसकी पदरज को नित्य धोकर
करता प्रणाम तुझको, मैं वे चरण दबाऊँ ।

सेवा में तेरी माता ! मैं भेदभाव तजकर
वह पुण्य नाम तेरा, प्रतिदिन सुनूँ सुनाऊँ ।

तेरे ही काम आऊँ, तेरा ही मन्त्र गाऊँ
मन और देह तुझ पर बलिदान मैं चढ़ाऊँ ।

Post a Comment

1 Comments

close